पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई
पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती घोटाला
उत्तर प्रदेश में 12 साल पुराने भर्ती घोटाले में बड़ी कार्रवाई, पूर्व IAS अधिकारी गिरफ्तार!
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2014 के पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती मामले ने एक बार फिर सुर्खियां बटोर ली हैं। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इस मामले में सेवानिवृत्त IAS अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित उनके आवास से की गई।
बताया जा रहा है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान योगेश कुमार पशुपालन विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थे। जांच एजेंसी के अनुसार, विवेचना के दौरान भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर उनकी भूमिका से जुड़े साक्ष्य सामने आए हैं। गिरफ्तारी से पहले शासन से आवश्यक अभियोजन स्वीकृति भी प्राप्त की गई थी।
आखिर क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2014 का है, जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। उस समय प्रदेश के 17 मंडलों में पशुधन प्रसार अधिकारी के 1,198 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित की गई थी। परीक्षा 2 फरवरी 2014 को हुई थी और इनमें से 1,005 अभ्यर्थियों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण और नियुक्ति दी गई थी।
लेकिन भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए। मामला न्यायालय तक पहुंचा और जांच के निर्देश दिए गए। जांच में कथित तौर पर भर्ती नियमों के पालन, OMR शीट के मूल्यांकन और मंडलीय चयन समितियों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवालों की पड़ताल की गई।
आरोपों में यह भी शामिल था कि OMR शीट के मूल्यांकन की व्यवस्था में बदलाव किया गया और चयन प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ। कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाए जाने की आशंका भी जताई गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां कैसे हुईं, फैसले किस स्तर पर लिए गए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका क्या थी?
EOW इस मामले में अधिकारियों की भूमिका और निर्णयों की पड़ताल कर रही है। पूर्व IAS अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
भर्ती में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े ऐसे मामलों में जरूरी है कि जांच निष्पक्ष हो और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
युवाओं के भविष्य से जुड़े भर्ती मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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