मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड, सौरभ राजपूत हत्याकांड

 

मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड


मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड


मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड, सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत का बड़ा फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत ने बुधवार को एक बहुत बड़ा फैसला सुनाते हुए मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। 
दोनों को मर्चेंट नेवी से जुड़े सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में 30 सितंबर को दोषी ठहराया गया था। बुधवार को जिला अदालत ने सजा के कई बिंदुओ पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया।

इस मामले ने उस समय पूरे देश का ध्यान अपने तरफ खींचा था, जब सौरभ राजपूत की हत्या और उनके शव को नीले ड्रम में छिपाकर सीमेंट से बंद करने की बात सामने आई थी। 
घटना की भयावहता और मामले से जुड़े तथ्यों ने लोगों को झकझोर कर रख दिया था।


कैसे सामने आया था पूरा मामला?


अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके में सौरभ राजपूत की हत्या की गई थी। आरोप था कि मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद पहचान और अपराध से जुड़े सबूत छिपाने के लिए शव को नीले ड्रम में रखकर सीमेंट से बंद कर दिया गया। घटना के बाद दोनों कातिल के हिमाचल प्रदेश जाने की बात भी सामने आई थी।

पुलिस की जांच के दौरान मामले की परतें खुलीं और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया करीब 13 महीने तक चली, जिसमें 100 से अधिक सुनवाइयां हुईं।


22 गवाहों के बयान बने मुकदमे का अहम हिस्सा


मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ कुल 22 गवाहों के बयान अदालत में पेश किए। इनमें सौरभ के भाई, मां और परिचितों के अलावा उन दुकानदारों की गवाही भी शामिल थी, जिनसे मामले से संबंधित सामान खरीदे जाने की बात सामने आई थी।

17 सितंबर को मामले में अंतिम बहस पूरी हुई थी। इसके बाद 30 सितंबर को जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने दोनों को दोषी करार देते हुए सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया।

सौरभ के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विजय बहादुर ने मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों का उल्लेख किया था। परिवार ने दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग की थी।

जेल में बेटी को जन्म देने की खबर भी रही चर्चा में


इस मामले का एक भावनात्मक पहलू भी सामने आया था। जेल में बंद रहने के दौरान मुस्कान ने नवंबर 2025 में एक बेटी को जन्म दिया था। उस समय बच्ची और मुस्कान से जुड़ी खबरें भी चर्चा में रही थीं। मीडिया रिपोर्टों में मुस्कान की अपनी बेटी से मिलने की इच्छा का जिक्र किया गया था।

हालांकि, इस मामले का केंद्र सौरभ राजपूत की हत्या और उसके बाद साक्ष्य छिपाने के आरोप ही रहे, जिन पर अदालत ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया।

फैसले के बाद आगे क्या?


अदालत के इस फैसले के साथ मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव पूरा हुआ है। हालांकि, मृत्युदंड के मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी अहम होती है। ऐसे मामलों में कानून के तहत उच्च न्यायालय की पुष्टि और उपलब्ध अपील संबंधी विकल्प महत्वपूर्ण होते हैं।

सौरभ राजपूत हत्याकांड ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि किसी जघन्य अपराध के बाद पीड़ित परिवार को न्याय तक पहुंचने के लिए कितनी लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। अब इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी।


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