क्या अमेरिका के सामने हुए नद्मस्तक मोदी जी,Payment and Settlement Systems (Amendment) Bill, 2026,
आज कल आपने देखा होगा कि कैसे ठेला चलाने वाले, ऑटो रिक्शा चलाने वाले, चाय बेचने वाले, अरे मोदी नहीं , मतलब आम जनता। कैसे आसानी से मोबाइल से भुगतान ले लेते हैं। लेकिन क्या आप को पता है कि अब इस पे भी चार्ज लगेगा।
क्या भारत ने UPI और RuPay से जुड़े कानून में बदलाव किया है? क्या अमेरिका के सामने मोदी जी एक बार फिर झुक गए हैं और क्या UPI के कानून में बदलाव से आम जनता को भोगना पड़ेगा
भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007
साल 2007 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 बनाया। यह कानून 12 अगस्त 2008 से लागू हुआ।
इसका उद्देश्य था भारत में सभी डिजिटल और बैंकिंग भुगतान को सुरक्षित, पारदर्शी और RBI की निगरानी में संचालित करना।
बाद में जब UPI और RuPay शुरू हुए, तो उनका संचालन भी इसी कानूनी ढांचे के तहत हुआ। तो फिर अचानक मोदी जी को इस कानून को क्यों बदलना पड़ा
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने अपनी रिपोर्टों में भारत की कुछ डिजिटल भुगतान नीतियों पर चिंता जताई।
MDR (Merchant Discount Rate)
अमेरिका का कहना था कि—
- - भारत की नीतियां NPCI, UPI और RuPay को बढ़ावा देती हैं।
- - Visa और Mastercard जैसी विदेशी कंपनियों को समान प्रतिस्पर्धा यानी Level Playing Field नहीं मिल रहा।
- - UPI और RuPay पर शून्य MDR (Merchant Discount Rate) जैसी नीतियों से विदेशी भुगतान कंपनियों के व्यापार मॉडल पर असर पड़ता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि ये अमेरिका की व्यापार संबंधी आपत्तियां थीं। और भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से यह नहीं कहा कि बाद में किया गया कानून संशोधन अमेरिका के दबाव में किया गया।
नया संशोधन कब आया ?
"अब बात करते हैं की हालिया संशोधन क्या और कब हुआ है
- 4 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार ने संसद में Payment and Settlement Systems (Amendment) Bill, 2026 पेश किया।
- 7 अगस्त 2026 को यह विधेयक लोकसभा से पारित हुआ।
मोदी सरकार ने इस कानून में संशोधन क्यों किया है..."
इस संशोधन के बाद सरकार को कुछ प्रकार के डिजिटल भुगतानों पर Merchant Discount Rate (MDR) या सेवा शुल्क से संबंधित व्यवस्था लागू करने का कानूनी आधार मिल गया है।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI भुगतान फिलहाल मुफ्त रहेगा।
यदि भविष्य में कोई शुल्क लागू होता है, तो वह मुख्य रूप से व्यापारियों द्वारा स्वीकार किए जाने वाले कुछ UPI लेन-देन पर लागू हो सकता है।
पूरा मामला क्या है:-
मनमोहन सिंह सरकार ने 2007 में वह कानून बनाया जिसने भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था की नींव रखी।
मोदी सरकार ने उसी कानून में संशोधन किया और कुछ प्रकार के डिजिटल भुगतानों पर MDR लागू करने का कानूनी आधार जोड़ा दिया ।
वही दूसरी ओर, अमेरिका लगातार यह कहता रहा कि भारत की UPI और RuPay संबंधी नीतियों से विदेशी कंपनियों जैसे Visa और Mastercard को समान प्रतिस्पर्धा नहीं मिलती।
लेकिन अब तक कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है कि भारत ने यह संशोधन अमेरिका के दबाव में किया है।
