“धोती-शॉल वाले महात्मा गांधी और सूट वाले ‘विश्वगुरु’: दो दौर, दो तस्वीरें”
गोलमेज सम्मेलन
पहल सम्मलेन (12 नवंबर 1930)
साल था 1930 जब गाँधी के सविनय अवज्ञा आन्दोलन और नामक सत्याग्रह आन्दोलन के कारण ब्रिटिश सरकार गाँधी के सामने घुटने टेक दिया था और इसी पर चर्चा करने के लिए अग्रेजो ने गाँधी को गोलमेज सम्मलेन में भाग लेने के लिए लंदन बुलया था ,लेकिन गाँधी और राष्र्टीय कांग्रेस पहले सम्मलेन में सम्मलित नहीं हुआ |
दूसरा गोलमेज सम्मेलन
लेकिन 1931 के सम्मलेन में गाँधी जी गोलमेज सम्मलेन में शामिल हुए और इसी दौरान गाँधी लन्दन पहुचे ,जिस समय गाँधी लंदन पहुचे उनके पास कोई राजकीय पोषक नहीं था ,और न ही कोई प्रतनिधि मंडल था गाँधी खुद एक धोती और शाल में इंग्लैंड पहुचे थे
आज कल के नेता विदेश यात्रा में करोडो का सूट पहनने के लिये करोडो रुपये खर्च करते है ,राजनितिक बहस कम मेलोडि जमकर बाटते है और यही नेता कहते है की गाँधी को पहले कोई जनता नहीं था जब से उनके ऊपर फिल्म बनी उनको लोग जानने लगे ,ये है “धोती-शॉल वाले महात्मा गांधी और सूट वाले ‘विश्वगुरु’: दो दौर, दो तस्वीरें”
इस पुरे सम्मलेन में गाँधी के आलावा कई अन्य लोग भी इसमें शामिल हुए थे जिसमके मुसलमानों के पक्ष कार और दलितों के पक्षकार डॉ भीमराव अम्बेडकर भी थे
डॉ. भीमराव आंबेडकर दलित वर्गों के लिए अलग राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे थे, जबकि गांधी जी इसका विरोध कर रहे थे।
दूसरा गोलमेज सम्मेलन में भारत को सकारात्मक परिणाम नहीं मिला और गंधी जी भारत वापस आ गए और एक बार फिर से सविनय अवज्ञा आंदोलन तेज कर दिया और अंतत ब्रिटश सम्राज्य को भारत छोड़ना पड़ा
जिस विचार धरा के द्वारा आज देश पर शासन किया जा रहा उनके लोग ने कभी भी ब्रिटिश प्रशासन से आजादी की मांग नहीं किया ,आज बहुत बड़े देश भक्त बनते है
