आजमगढ़ में पूजा के दौरान खूनी वारदात: पत्नी और 2 पुरोहितों की हत्या, आरोपी की मुठभेड़ में मौत, बेटे ने भी दम तोड़ा

 

आजमगढ़ में पूजा के दौरान खूनी वारदात: पत्नी और 2 पुरोहितों की हत्या, आरोपी की पुलिस मुठभेड़ में मौत; बेटे ने भी दम तोड़ा



आजमगढ़, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार शाम एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हुई हिंसा ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। घर में चल रही पूजा के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि गोलीबारी में एक महिला और दो पुरोहितों की मौत हो गई। इसके बाद आरोपी ने अपने बच्चों को लेकर खुद को एक कमरे में बंद कर लिया।

कई घंटे चले पुलिस रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद हुई फायरिंग में आरोपी अरविंद सिंह घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई। इस दौरान उसका एक बेटा भी गंभीर रूप से घायल हुआ, जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उसकी दो बेटियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

पूजा के दौरान शुरू हुआ विवाद

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, शंभूपुर गांव स्थित अरविंद सिंह के घर में कई दिनों से धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था। परिवार की ओर से यह पूजा अरविंद की स्थिति में सुधार की उम्मीद में कराई जा रही थी।

मंगलवार शाम अरविंद के घर लौटने के बाद उसकी पूजा करा रहे पुरोहितों से कहासुनी शुरू हो गई। रिपोर्टों के अनुसार, उसने पुरोहितों से उनकी पहचान से संबंधित दस्तावेज मांगे थे। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और उसकी पत्नी बबीता ने बीच-बचाव किया।

इसके बाद स्थिति अचानक हिंसक हो गई और अरविंद ने कथित तौर पर अपने लाइसेंसी हथियार से फायरिंग कर दी। गोलीबारी में उसकी पत्नी बबीता सिंह और दो पुरोहितों की मौत हो गई। मृतकों में महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा के नाम सामने आए हैं।

तीन बच्चों के साथ कमरे में बंद हुआ आरोपी

घटना के बाद आरोपी अपने बच्चों को लेकर घर के एक कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। इस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची।

पुलिस ने काफी देर तक आरोपी को समझाकर आत्मसमर्पण कराने का प्रयास किया। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने सावधानी से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। रिपोर्टों के अनुसार, यह गतिरोध करीब सात घंटे तक चला।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान हुई फायरिंग

पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान कमरे के भीतर से गोली चलने के बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई की। दरवाजा खोलकर बच्चों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। इसी दौरान आरोपी की ओर से भी फायरिंग किए जाने की बात सामने आई।

जवाबी कार्रवाई में अरविंद सिंह गंभीर रूप से घायल हुआ। उसे और घायल बच्चे को अस्पताल ले जाया गया, जहां अरविंद की मौत हो गई। उसका बेटा भी गंभीर हालत में था और बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। दो अन्य बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया।

पांच मौतों ने पूरे गांव को सदमे में डाला

इस घटना में अब तक कुल पांच लोगों की जान जाने की जानकारी सामने आई है—अरविंद की पत्नी बबीता, दो पुरोहित, आरोपी अरविंद और उसका घायल बेटा।

एक ही परिवार और उससे जुड़े लोगों की मौत से शंभूपुर गांव में मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस ने घटनास्थल को घेरकर जांच शुरू कर दी है और फोरेंसिक टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए हैं।

घटना ने कई सवाल भी खड़े किए

यह वारदात केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि परिवार, बच्चों और समाज के सामने कई गंभीर सवाल छोड़ गई है। आखिर मामूली कहासुनी इतनी बड़ी हिंसा में कैसे बदल गई? हथियार आरोपी तक कैसे पहुंचा और स्थिति को समय रहते नियंत्रित क्यों नहीं किया जा सका—इन सभी पहलुओं की जांच पुलिस कर रही है।

मामले से जुड़े कुछ पारिवारिक और पुराने विवादों का भी विभिन्न रिपोर्टों में उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल

इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि विवाद और हिंसा के बीच मासूम बच्चे भी फंस गए। एक बच्चे की जान चली गई, जबकि दो बच्चों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाला।

ऐसी घटनाएं यह याद दिलाती हैं कि किसी भी विवाद में हिंसा का रास्ता पूरे परिवार और समाज के लिए विनाशकारी परिणाम ला सकता है। मामले की पूरी सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी।

नोट: इस खबर में आरोपी से जुड़े आरोपों को उपलब्ध पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर लिखा गया है। जांच पूरी होने तक किसी भी दावे को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

Please Select Embedded Mode To Show The Comment System.*

Previous Post Next Post

Contact Form